एक से तैयार होंगे दस लाख पौधे, कानपुर और पश्चिमी उ8ार प्रदेश सहित सभी संस्करणों के लिए प्रस्तावित


एक से तैयार होंगे दस लाख पौधे, कानपुर और पश्चिमी उ8ार प्रदेश सहित सभी संस्करणों के लिए प्रस्तावित

न तो बीमारी लगने का डर और न ही मौसम की रुकावट, किसी भी फसल के पौधे बिना बीमारी लगे सिर्फ प्लास्टिक के जार में ही तैयार किए जा रहे हैं। ‘माइक्रोप्रॉपेगेशन’ की इस विधि को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के बायोटे1नॉलॉजी विभाग के कृषि वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इसका महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सिर्फ एक पौधे से साल भर में दस लाख तक पौधे तैयार किए जा सकेंगे। इससे किसानों तक सस्ती दर पर स्वस्थ पौधे पहुंच सकेंगे। इस सरल प्रक्रिया को कोई भी इच्छुक व्य1ित सिर्फ ५ हजार रुपये फीस देकर एक महीने में सीख सकता है और अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है।यह सब कुछ ‘टिश्यू कल्चर’ का ही एक हिस्सा है। जिस तरह किसी भी दस्तावेज की फोटो कॉपी तैयार की जाती है, ठीक उसी प्रकार इस प्रक्रिया से पौधों की ‘कॉपियां’ तैयार की जाती हैं। इस तकनीक से पुराने पौधों का नवीनीकरण भी हो सकता है और पौधों को बीमारी रहित भी किया जा सकता है। इससे जहां किसानों को आय का अतिरि1त साधन मिलेगा, वहीं बीमारियों से फसल के नष्ट होने का खतरा भी बहुत कम हो जाएगा।

गन्ने की फसल से इसके जरिए ०.२ प्रतिशत तक रिकवरी (रस) अधिक ली जा सकती है, जबकि बाकी फसलों में उत्पादन दर कितनी बढ़ेगी, इस पर शोध जारी है। इस विधि से तैयार पौधे तीन से पांच रुपये में उपल4ध हो सकते हैं। बायोटे1नॉलॉजी विभाग के प्रोफेसर डा.एसएस गोसल ने बताया कि विभाग किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहा है

पीएयू बायोटे1नॉलॉजी विभाग ने अभी तक गन्ने, आलू, स्ट्राबेरी, यूकलिप्टस, पॉपुलर, नीम, सिट्रस फलों, फूलों और मेडीसिनल प्लांट सहित पंद्रह फसलों पर इस विधि के जरिए शोध किया है। इस तकनीक से तैयार आलू के ऐसे बीज अब पंजाब में ही उपल4ध हैं, जिनमें कोई बीमारी नहीं होती। इसके पहले तक होशियारपुर, जालंधर और अन्य कई इलाकों के आलू उत्पादक किसान बिना बीमारी वाले आलू के बीज खरीदने के लिए हिमाचल प्रदेश की दौड़ लगाते थे।

उच्च शिक्षा में विदेशी निवेश को बढ़ावा देंगे, लघु उद्योगों में भी एफडीआई पर जोर

मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि उच्च शिक्षा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नीतियों को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। अर्जुन सिंह ने कहा कि विचारधारा के तौर पर इसमें कोई मतभेद नहीं होना चाहिए, लेकिन उच्च शिक्षा जैसे संवेदनशील मसले को ध्यान में रखते हुए कुछ नियंत्रण जरूरी है। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार लघु उद्योगों में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष विदेश निवेश को उदार बनाएगी। उन्होंने कहा कि इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, निर्माण उद्योग का भी विस्तार हो सकेगा।अर्जुन सिंह ने निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक, २००४ का हवाला देते हुए कहा कि इस विधेयक को नए बजट सत्र में मंजूरी मिल सकती है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा में विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शिक्षा पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरतों के चलते सभी राजनीतिक दलों ने इस सुझाव का स्वागत किया है।

राजग सरकार द्वारा शुरू की गई शिक्षा योजनाओं की समीक्षा करने के बाद अर्जुन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उनका मंत्रालय सर्वशिक्षा अभियान को पूर्व की भांति जारी रखेगा और इसमें तेजी लाने की कोशिश भी करेगा। यद्यपि सभी बच्चों को दिसंबर २००३ तक स्कूल पहुंचाने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया यह अभियान अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। खासकर उ8ार प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वो8ार के राज्यों में यह अभियान पूरा नहीं हो पाया है। लेकिन अर्जुन सिंह इसकी धीमी गति को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हंै। लेकिन उन्होंने कहा है कि इसे पटरी पर लाने के लिए वह खुद इसकी समीक्षा करेंगे। संसद का चालू सत्र खत्म होने के बाद वह विभिन्न राज्यों का दौरा करके खुद सर्वशिक्षा अभियान के कार्यान्वयन की जानकारी लेगी। शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए प्रस्तावित बिल को अर्जुन सिंह भी संसद में लाने के पक्षधर हैं। लेकिन अभी यह तय नहीं है कि पूर्व सरकार के समय में तैयार हुए इस बिल में कितने संशोधन होंगे।

पेट्रोल की कीमतें १५ जून तक नहीं बढ़ेंगी, स्थिति से निपटने को नई ‘प्रक्रिया’ की तैयारी

केंद्र की स8ाारूढ़ यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस सरकार ने इन संभावनाओं को 2ाारिज कर दिया है कि १५ जून से पहले पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी की जाएगी। पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने बृहस्पतिवार को कहा कि वे प्रधानमंत्री और वि8ा मंत्री से इस मसले को निपटाने के लिए मिलेंगे। साथ ही, अय्यर ने कहा कि सरकार एक ऐसी प्रक्रिया विकसित करने का प्रयास कर रही है, जिससे उपभो1ताओं पर बढ़ी हुई कीमतों का असर कम हो। गौरतलब है कि ओपेक द्वारा कच्चे तेल के दामों में वृद्धि कर देने से ऐसी समस्या उत्पन्न हो गई है।अय्यर ने कहा कि १५ जून तक अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों को परखने के लिए काफी समय है। उन्होंने कहा कि तेल उत्पादक देशों के संघ ओपेक ने तेल की कीमतों को स्थिरता देने के बारे में सोचा है। माना जा रहा है कि पेट्रोलियम उत्पादों के दामों को तय करने में वाम दलों को पूरे मन से विश्वास में लिया जाएगा। उधर, पेट्रोलियम मंत्रालय बाजार की गतिविधियों पर अगले दो दिनों तक नजर रखेगा।

उधर, सउदी अरब के राजदूत सलेह एमल-घा6दी ने कहा कि वह ओपेक द्वारा बढ़ाए गए तेल की कीमतों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि एक बैरल तेल की कीमत को २२ से बढ़ाकर २८ डॉलर करना कहीं से भी तार्किक नहीं है। घा6दी ने कहा कि एक बार वातावरण में स्थिरता आ जाएगी तो लोगों का डर खत्म हो जाएगा।

उधर, लंदन में भी ओपेक द्वारा कच्चे तेल कीमतों के बढ़ाये जाने के फैसले को लेकर तेल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई। वहीं न्यूयॉर्क में ओपेक के फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

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