सोनिया गांधी से मिले धरम सिंह, जद-एस ने की महत्वपूर्ण पदों की मांग


सोनिया गांधी से मिले धरम सिंह, जद-एस ने की महत्वपूर्ण पदों की मांग

कर्नाटक में महत्वपूर्ण पदों की मांग को लेकर मंत्रिमंडल के गठन पर गतिरोध बरकरार है। राज्य में महाराष्ट्र की तर्ज पर सरकार बनाने पर जनता दल (एस) अब महत्वपूर्ण पदों की मांग कर रही है जबकि कांग्रेस का कहना है कि महाराष्ट्र का फॉर्मूला सिर्फ मु2यमंत्री और उपमु2यमंत्री पर ही लागू है। इस गतिरोध को दूर करने के लिए कर्नाटक के मु2यमंत्री धरम सिंह बृहस्पतिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले।सोनिया गांधी के निवास से बाहर निकलते हुए सिंह ने संवाददताओं से कहा कि दोनों पार्टियों के बीच चल रहे मतभेदों को एक-दो दिन में दूर कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि जनता दल (एस) द्वारा महत्वपूर्ण पदों की मांग की जा रही है।

वहीं राज्य में मंत्रिमंडल के गठन में हो रही देरी के बारे में पूछ जाने पर राज्य के उपमु2यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि महाराष्ट्र में जो भी विभाग एनसीपी को दिए गए हैं वही हमें मिलने चाहिए 1योंकि कर्नाटक में भी महाराष्ट्र का फॉर्मूला अपनाया गया है।

वहीं जद (एस) के सूत्रों ने कहा कि उनकी पार्टी ने मंत्रिमंडल के गठन के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है लेकिन सीमा से अधिक इस अनिश्चितता को बनाए रखने के हक में भी हम नहीं हैं। सूत्रों ने कांग्रेस से कहा कि जब आप महाराष्ट्र में गृह, वि8ा और राजस्व विभाग अपने गठबंधन के सहयोगियों को दे सकते हैं तो यहां आप अपनी प्रतिबद्धता से पलट नहीं सकते।

बुधवार रात को कांग्रेस नेता अहमद पटेल और जद (एस) अध्यक्ष एच. डी. देवगौड़ा की मुलाकात में पार्टी की चिंता से अवगत करा दिया गया। उन्होंने कहा कि जद (एस) जूनियर सहयोगी के तौर कार्य करने की इच्छुक नहीं है। मु2यमंत्री धरम सिंह पिछले कुछ दिनों से यहां डेरा जमाए हुए हैं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी कर चुके हैं। कर्नाटक के उपमु2यमंत्री सिद्धरमैया भी इन दिनों दिल्ली में ही हैं। उ6मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस और जद (एस) के आठ-आठ मंत्री शनिवार को शपथ ले सकते हैं।

सपा अब डिनर डिप्लोमेसी में जुटी, तीसरे मोरचे के लिए वाम दलों को मनाने में नाकाम

लोकसभा चुनाव में बेहतरीन कामयाबी के बावजूद राष्ट्रीय राजनीति में अपनी कोई अहम भूमिका न बनने से परेशान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बृहस्पतिवार को डिनर डिप्लोमेसी के जरिए अपनी राजनीति दुरुस्त करने की कोशिश की। मुलायम ने सपा के नवनिर्वाचित सांसदों के साथ वामदलों को आज रात डिनर पर बुलाया और उन्हें तीसरे मोरचे के लिए रजामंद करने की कोशिश की लेकिन मुलायम की यह कोशिश भी नाकाम रही। वामदलों ने मुलायम को समझा दिया है कि जहां तक जनहित से जुड़े मुद्दों का सवाल है तो वाम दल दबाव वाली ताकत की भूमिका निभाने में मुलायम का साथ दे सकते हैं लेकिन वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे नई सरकार के स्थायित्व को ठेस पहुंचे।वामदलों के नेताओं को डिनर पर बुलाना इस मायने में भी अहम है कि बीते दिनों दोनों के संबंध काफी तल्ख हो गए थे। खास तौर पर जिस तरह मुलायम सिंह और अमर सिंह ने माकपा महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत पर हमले किए उससे वामदलों को काफी ठेस पहुंची। माना जा रहा है कि मुलायम ने वामदलों को डिनर देकर उन्हें फिर से खुश करने की कोशिश की है। आज अचानक ही उन्होंने डिनर का न्योता वाम दलों के नेताओं के पास भेजा जिसे लेकर खुद वामदलों के नेता हैरत में थे। भाकपा सचिव डी राजा का कहना था कि वे इस डिनर का मकसद नहीं समझ पाए लेकिन चूंकि न्योता था इसलिए उन्हें जाने में गुरेज नहीं हुआ। डिनर में वामदलों की ओर से सुरजीत, सोमनाथ चटर्जी, सीताराम यचूरी, ए.बी.वर्धन. डी.राजा, देवब्रत बिस्वास और अवनि राय के साथ राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी शामिल हुए। डिनर में सपा के नवनिर्वाचित सांसदों को भी बुलाया गया था।


बिस्वास ने ‘India’ से बातचीत में माना कि डिनर का मकसद गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दलों की एकजुटता तलाशना था। बताया जाता है कि मुलायम ने डिनर के दौरान तीसरे मोरचे को फिर से सक्रिय करने की इच्छा जताई। इसके लिए उन्होंने वामदलों को पहल करने को कहा। सूत्रों के मुताबिक वाम दलों ने मुलायम से कहा है कि जहां तक सरकार पर दवाब बनाने का सवाल है वे मुलायम का साथ देने को तैयार हैं लेकिन सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों का वामदल कतई समर्थन नहीं करेंगे।


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