नेताजी सुभाषचंद्र मामले की जांच आगे बढ़ेगी


नेताजी सुभाषचंद्र मामले की जांच आगे बढ़ेगी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मानना है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले में जारी जांच कार्य को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि सच्चाई को सामने लाया जा सके। उन्होंने इस दिशा में सरकार की तरफ से हरसंभव सहयोग दिए जाने की बात भी कही है। उन्होंने यह आश्वासन आज फॉरवर्ड 4लाक के एक प्रतिनिधिमंडल को दिया। फॉरवर्ड 4लाक के महामंत्री देवब्रत विस्वास की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें इतनी जांच पड़ताल के बावजूद नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बारे में सच्चाई सामने न आ पाने पर रोष जताया गया है। फॉरवर्ड 4लाक ने नेताजी के बारे में तथ्य जुटाने के लिए बने मुखर्जी आयोग को ताइवान और रूस जाने देने की अनुमति दिए जाने की मांग भी प्रधानमंत्री के सामने रखी है। फॉरवर्ड 4लाक का कहना है कि मुखर्जी आयोग को दलीलें और दस्तावेज जुटाने के लिए ताइपे (जहां विमान हादसा हुआ था) और रूस जाने दिया जाना चाहिए। इससे आयोग को नेताजी के बारे में तमाम अहम सुराग मिल सकते हैं।

हवाई अड्डों के निजीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार संभव

माकपा ने विरोध जताया निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

केंद्र सरकार देश के हवाई अड्डों के निजीकरण मसले पर पुनर्विचार कर सकती है। नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल द्वारा बुधवार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा ४९ फीसदी घोषित करने के बाद सरकार के कुछ धड़ों में विरोध के स्वर मुखर होने लगे। सूत्रों का कहना है कि पटेल ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय को विश्वास में नहीं लिया, जो कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए नोडल मंत्रालय का काम करते हैं। माकपा ने भी इस कदम का विरोध किया है। माकपा महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत ने भी पटेल को पत्र लिखा है और उनसे हवाई अड्डों का निजीकरण फिलहाल न करने की अपील की।उधर, मुंबई और दिल्ली के हवाईअड्डों के आधुनिकीकरण के संबंध में अपनी योजनाओं की जानकारी देने के एक दिन बाद ही भारतीय विमानप8ान प्राधिकरण कर्मचारी संघ ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया जिसमें श्रमिक संगठन सीटू के महासचिव एम.के. पंधे के साथ माकपा नेता सीताराम येचुरी भी शामिल हुए। पर इस मामले पर वामदल बंटे हुए नजर आ रहे हैं। शायद यही वजह है कि इस विरोध प्रदर्शन में अन्य वामदलों के प्रतिनिधि और श्रमिक संगठन शामिल नहीं थे।

इस प्रदर्शन के संबंध में सीटू महासचिव पांधे का कहना है, हम निजीकरण के खिलाफ हैं। न्यूनतम साझा कार्यक्रम में भी निजीकरण न किए जाने की बात कही गई है और इस पर आंदोलन जारी रखा जाएगा। गौरतलब है प्रफुल्ल पटेल ने कल ही कहा था कि हवाईअड्डों को आधुनिकीकरण के लिए लीज पर दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा ७४ फीसदी के बजाय ४९ फीसदी किए जाने की बात कही थी। बाकी ५१ फीसदी में सरकार की हिस्सेदारी २६ और भारतीय कंपनियों की २५ फीसदी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर भारतीय कंपनियां चाहें तो २५ के बजाए पूरे ७४ फीसदी के लिए भी दावा पेश कर सकती हैं। ऐसे में निजीकरण को लेकर विरोध के स्वर उठना स्वाभाविक ही है। विरोध प्रदर्शन में इस बात पर जोर भी दिया गया कि निजीकरण बंद होना चाहिए।

इस बीच, श्रमिकों के हितों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अपनी रणनीति तेज करना शुरू कर दिया है। अपनी मांगों को लेकर सीटू समेत वामदलों के सभी कर्मचारी संगठन ५ जून को वि8ा मंत्री पी. चिदंबरम् से मुलाकात करने वाले हैं। इसमें श्रमिक संगठन निजीकरण बंद करने की मांग को तो जोरशोर से उठाएंगे ही। कर्मचारी भविष्य निधि, सार्वजनिक भविष्य निधि और छोटी बचतों पर 4याज दर बढ़ाने की मांग भी करेंगे। इसके अलावा आयकर छूट की सीमा बढ़ाने के लिए भी जोर दिया जाएगा। श्रमिक संगठन इन्हीं मांगों के साथ श्रम मंत्री शीशराम ओला से भी मुलाकात कर चुके हैं और उनका प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिलने का इरादा है।

स्पीकर पद पर चटर्जी का चुना जाना तय

मा1र्सवादी क6युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी शुक्रवार को एक इतिहास रचेंगे, जब वह लोकसभा के स्पीकर पद पर बैठने वाले पहले क6युनिस्ट होंगे। ७५ वर्षीय चटर्जी के समर्थन में बृहस्पतिवार शाम तक नामांकन दाखिल करने का व1त पूरा होने तक अनेक पार्टियों ने उन्हें अपना समर्थन सौंप दिया था। कांग्रेस गठबंधन के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भी चटर्जी को समर्थन दिया और इस लिहाज से उनके पक्ष में १८ नामांकन सेट दाखिल किए गए। शुक्रवार को चटर्जी सर्वस6मति से लोकसभा के स्पीकर पद पर काबिज हो जाएंगे। संसदीय मामलों के मंत्री गुलाम नबी आजाद ने बताया कि सोमनाथ चटर्जी को हर राजनीतिक दल का समर्थन प्राप्त हो गया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को इसके लिए बधाई भी दी है। आजाद ने कहा कि लोकतंत्र का इससे बढिय़ा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा यह सोमनाथ चटर्जी की वाक्पटुता, कुशल नेतृत्व और अनुभव की मिसाल है, जब उन्हें हर का समर्थन प्राप्त हो सका है। उधर, लोकस5ाा के सेक्रेटरी जनरल और स्पीकर चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर जी.सी. मलहोत्रा ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

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