जोशी ने किया ‘कंचना स्मृति’ का विमोचन कहा, बाजारीकरण ने दी पत्रकारिता को नई चुनौती


जोशी ने किया ‘कंचना स्मृति’ का विमोचन कहा, बाजारीकरण ने दी पत्रकारिता को नई चुनौती

India की दिवंगत पत्रकार श्रीमती कंचना की स्मृति में शनिवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन 1लब में ‘वर्तमान राजनीतिक संदर्भों में पत्रकारिता की चुनौतियां’ विषय पर एक व्या2यानमाला आयोजित की गई। पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी इस कार्यक्रम के मु2य वक्ता थे। इस मौके पर श्रीमती कंचना की याद में प्रकाशित स्मारिका ‘कंचन स्मृति’ का भी विमोचन किया गया। गौरतलब है कि ३३ वर्षीय श्रीमती कंचना की २७ सितंबर २००३ को प्रगति मैदान के पास एक सडक़ हादसे में मौत हो गई थी। कंचना अमर उजाला के इंटरनेट संस्करण में उपसंपादक के पद पर कार्यरत थीं।इस मौके पर आयोजित व्या2यानमाला में पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने पत्रकारों से तथ्यपरक पत्रकारिता करने का आग्रह किया। इतिहास के भगवाकरण पर अपना बचाव करते हुए जोशी ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पाठ्यक्रम में परिवर्तन के लिए पहली बार तीन हजार से ज्यादा पत्रकार, राजनेता और संबंधित व्यक्तियों और संस्थानों को इसका मसौदा भेजा था। बाद में इस पूरी सामग्री को इंटरनेट पर भी डाला गया लेकिन उन्हें किसी की ओर से कोई सुझाव नहीं मिले। इसके बाद संसद में बहस हुई जिसके बाद राजग सरकार ने इस पाठ्यक्रम को अनुमति दी।

मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि आईआईएम विवाद पर आईआईएम से संबंध रखने वाले लोगों के विचार को तो मीडिया तवज्जों दे रहा है लेकिन उनके और उनकी पार्टी के विचारों को जगह नहीं दी जा रही है। जोशी ने कहा कि पत्रकारों को तथ्यों पर आधारित बात करनी चाहिए न कि समाचारों में अपने विचार लिखने चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपना अध्ययन जारी रखना चाहिए जिससे वे अपडेट रहें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ स्तं5ाकार प्रेम शंकर झा ने कहा कि पत्रकारिता में गला काट स्पर्धा के चलते हम हर खबर क ी पुष्ठि नहीं कर पाते जिसके चलते कुछ समाचार जो बिल्कुल सत्य नहीं होते वो भी अखबार में स्थान पा जाते हैं। उन्होंने कहा कि ‘पहले अखबार दावा करते थे कि हम सत्य छापते है लेकिन आज हम तथ्य छापते हैं और हो सकता है उनमें से कुछ सत्य भी हो’ उन्होंने नए पत्रकारों की पीड़ा का भी जिक्र किया। जनस8ाा समाचार सेवा के संपादक रामबहादुर राय, लोकमत के संपादक अच्युतानंद मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती सुधा महालिंगम ने भी अपने विचार रखे।

ट्रेन रद्द होने से हुई परेशानी का हर्जाना दिलाया

उपभो1ता विवाद निवारण आयोग ने से1टर-१७ स्थित रेलवे आरक्षण कार्यालय, अंबाला कैंट के स्टेशन मास्टर और उत्तर रेलवे के क्षेत्रीय प्रबंधक को सेवाओं में कोताही का दोषी ठहराते हुए उन्हें वकील के.एस.मलका को नौ हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया है।वकील के.एस.मलका ने आयोग में दायर शिकायत में कहा था कि २४ दिसंबर २००१ को उन्होंने रेलवे आरक्षण कार्यालय से अंबाला कैंट से हरिद्वार जाने के लिए गंगानगर-हरिद्वार ए1सप्रेस से एक सीट बुक करवाई। निर्धारित दिन वे अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। रेलगाड़ी चलने के कुछ समय पहले ही स्टेशन पर घोषणा की गई कि किन्हीं कारणों से गंगानगर ए1सप्रेस हरिद्वार नहीं जाएगी। स्टेशन मास्टर से गाड़ी न जाने का कारण पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए कोई अन्य व्यवस्था भी नहीं की गई। पूछताछ करने पर बताया गया कि हरिद्वार के लिए अंबाला से एक पैसेंजर ट्रेन चलेगी जो रात के समय हरिद्वार पहुंचेगी।

शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें हरिद्वार के रास्ते ऋषिकेश अपनी नातिन की शादी में उसी दिन पहुंचना था लेकिन ट्रेन रद हो जाने के कारण उन्हें मानसिक व शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में शिकायतकर्ता को अपनी कार से ऋषिकेश जाना पड़ा। इस परेशानी के एवज में आयोग उन्हें किराया टिकट १५५ रुपये सहित कार से यात्रा खर्च एक हजार रुपये, मानसिक परेशानी उठाने के लिए दस हजार रुपये और पांच हजार रुपये याचिका खर्च के रुपये में दिलवाए।

जवाब में रेल प्रशासन ने कहा कि संसद पर आतंकी हमले के कारण सैन्य अभियान के चलते अचानक आपात व्यवस्था लागू कर दी गई और रेल व्यवस्था में परिवर्तन किया गया। इसी कारण तय दिन गंगानगर ए1सप्रेस हरिद्वार नहीं जा पाई। रेलवे के वकील ने कहा कि आयोग के पास शिकायत सुनने का अधिकार भी नहीं है। ऐसे में शिकायत को खारिज किया जाए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने रेलवे द्वारा यात्रियों को रेलगाड़ी स्थगित किए जाने के संबंध में पहले से कोई सूचना न देने का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को आठ हजार रुपये हर्जाना और एक हजार रुपये याचिका खर्च अदा करने के आदेश सुनाए।

Reactions

Post a Comment

0 Comments