विद्यार्थियों में दैनिक दिनचर्या के लिये सुझावात्मक कार्यक्रम

विद्यार्थियों में दैनिक दिनचर्या के लिये सुझावात्मक कार्यक्रम

विद्यार्थियों में अनुषासन की आदत डालने के लिए यह आवष्यक है कि विद्यार्थियों के लिये दैनिक कार्यकलाप हेतु समय निर्धारित किया जाना चाहिए। इसके लिये एक सुझावात्मक कार्यक्रम नीचे दिया जा रहा है। इसे शाला के समय के अनुसार परिवर्तित किया जा सकता है। 

 5 से 6.30 बजे के समय स्पोर्टस फाॅर डबलपमेंट के कार्यक्रम के अन्तर्गत खेलकूद करवायें। 
 विद्यार्थी की दिनचर्या को व्यवस्थित रूप से योजनाबद्ध किया जाये। जिसमें मुख्य रूप से कालखण्डों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाए जिससे विद्यार्थाी को अपने व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास हेतु सभी कार्यों के लिए उचित समय प्रापत हो सके। प्रातः काल में प्रार्थना एवं व्यायाम आदि उचित देखरेख में संपादित किए जाए तथा सायंकाल में एक घंटा मैदानी खेल में विद्यार्थी को आवष्यक रूप से सहभागिता करने हेतु प्रेरित किया जाए। 
 दैनिक दिनचर्या - प्रतिदिन भोजन से पूर्व विद्यार्थियों से प्रार्थना करवायी जाय - 
भोजन से पूर्व प्रार्थना 
अन्य ग्रहण करने से पहले, विचार मन में करना है, 
किस हेतु से इन शरीर का, रक्षण पोषण करना है,

(3) भोजन पकानें का भोज्य तत्वों पर प्रभाव -


3.1 कार्बोहाइड्रेड - भोजन में उपस्थित स्टार्च के उचित पाचन के लिये भोजन का पकाना आवष्यक है। गीलें स्टार्च के पकनें से स्टार्च कण फूलकर फट जातें है तथा उनका जिलेटनीकरण हो जाता है। पका हुआ स्टार्च कच्चे स्टार्च की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। वनस्पति कोषिकाओं की बाहरी दीवार भी पकानें की क्रिया में टूट जाती है। जिससे अन्दर के तत्व आसानी से पच जाते है।
3.2 वसा - भोजन पकानें से वसा के ऊपर कोई प्रभाव नही पड़ता है। बहुत अधिक ताप पर बहुत देर तक वसा गर्म करने से वसा के फेटी एसिड विभक्त हो जातें है जो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालतें है।
3.3 प्रोटीन - पाकने की क्रिया से प्रोटीन जमकर सिकुड़ जाती है। हल्की पकी हुई प्रोटीन कच्ची प्रोटीन की अपेक्षा जल्दी पच जाती है पर भोजन के अधिक पकाने से जैसे अधिक भूननें व तलने की क्रिया में प्रोटीन का पोषण महत्व कम हो जाती है।

(4) विटामिन्स -

4.1 विटामिन ‘ए’ व कैरोटीन - विटामिन ‘ए’ व कैरोटीन के जल में अघुलनषील होने के कारण ये तत्व भोजन के जल में नही आ पातें है तथा यह जल फेंकने पर विटामिन ‘ए’ की कोई हानि नही होती है।
4.2 थायमिन - भोजन को पकातें सयम कुछ थायमिनक के विभक्तिकरण के कारण थायमिन की हानि होती है। थायमिन पानी में घुलनषील होनें के कारण भोजन के पानी में आ जाता है। यदि यह पानी फेंक दिया जाता है तो थायमिन की हानि होती है। यदि चना या राजमा पकातें हुए खानें को सोडा प्रयोग किया जाता है तो भोज्य पदार्थ में उपस्थित थायमिन नष्ट हो जाता है। 
4.3 राइबोफ्लेविन - खाना पकातें हुए तेज प्रकाष के सम्पर्क में आने पर भोजन का राइबोफ्लेविन नष्ट हो जाता है। ऊष्मा तथा क्षार की क्रिया से भी राइबोफ्लेविन नष्ट हो जाता है। 
राइबोफ्लेविन भी जल में घुलनषील होने के कारण भोजन के जल में आ जाता है। जिसें फेंक देने पर राइबोफ्लेबिन की हानि होती है।
4.4 नायसिन - भोजन के पानी कों फेंक देने पर नायसिन की भी हानि होती है।
4.5 विटामिन ‘सी’- भोजन पकानें की क्रिया में विटामिन सी का वायु से आक्सीकरण होनें के कारण विटामिन ‘सी’ नष्ट हो जाता है। विटामिन ‘सी’ पानी में घुलनषील होने के कारण भी नष्ट हो जाता है। इसी कारण गर्म दाल में नींबू ऊपर से निचोड़ें।
4.6 खनिज तत्व - पकें भोजन का पानी फेंक देने से कैल्षियम, फास्फोरस, लोहा, सोडियम, पोटेषियम, मैग्निषियम आदि विभिन्न खनिज तत्वों की हानि होती इसी तरह भोजन को लोहे के चाकू से काटनें या लोंहे के बर्तन में पकानें से भोजन में लोहें की मात्रा बढ़ जाती है। भेाजन में नमक का प्रयोग उसमें सोडियम की मात्रा बढ़ा देता है।
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