सह शैक्षिक एवं सह पाठ्यक्रम क्रियाकलाप

 2. स्वच्छता/पवित्रता का भी पूरा ध्यान उपर्युक्त टोली रखेगी।

3. छात्रावास प्रभारी के संरक्षण में यह टोली कार्य करेगी।

4. उपर्युक्त प्रबन्धन का भोजन प्रबन्धन षिक्षण के रूप में लिया जाएगा।

(12) भण्डारण एवं भोजन निर्माण प्रक्रिया -

1. आटा, दाल-चावल एवं मसाले रखने का पर्याप्त स्थान होना चाहिए।

2. फल, सब्जियाॅ, दूध, दही, पनीर आदि की सुरक्षा के लिए फ्रीज (बडा) या फ्रीजर होना चाहिए।

3. 5-5 किलो के डिब्बे (गैर प्लास्टिक) कम से कम 12 होने चाहिए।

4. भोजन संबंधी सामग्रियों के नाम संस्कृत में लिखकर भोजनशाला में लगाए जाए।

5. भोजन निर्माण की प्रक्रिया बच्चे भी सीखे।

6. भोजनालय में भोजन बनाने की प्रक्रिया को छात्रों को देखने का अवसर दिया जाए।

7. भोजन बनाने संबंधी प्रतियोगिता (प्रोत्साहन) कराया जाए।

बिन्दु क्रमांक - 04 सह शैक्षिक एवं सह पाठ्यक्रम क्रियाकलाप

विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण में शैक्षिक गतिविधियों के साथ सह पाठ्यक्रम गतिविधियाँ भी आवष्यक मानी गयी है। भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत साहित्य में संगीत, नृत्य एवं नाट्यषास्त्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। आवासीय संस्कृत विद्यालयों में इन गतिविधियों का आयोजन निम्नानुसार सुनिष्चित किया जा रहा है।

सांस्कृतिक, सांगीतिक, नृत्य एवं नाट्य गतिविधियाॅं

(1) उद्देष्य -

 विद्यार्थी भारतीय संसकृति के कलात्मक स्वरूप का अभिज्ञान करते हुए उसके संवाहक बनें।

 सभी गतिविधियों का सहषैक्षिक स्तर पर सतत् एवं व्यवहारिक मूल्यांकन हो।

(2) गतिविधियाॅं-

 विद्यालय में उत्सवों, विषेष दिवसों एवं त्योहारों का आयोजन हो।

 साड्ड.ीतिक गतिविधियाॅं -

गायन प्रषिक्षण लोक गायन, सुगम गायन, शास्त्रीय गायन (इन गायन की शैलियों में वैदिक एवं लौकिक संस्कृृत काव्य साहित्य का समावेष आवष्यक है)

वादनप्रषिक्षण लोकवाद्य, तबला, हारमोनियम, ढोलक, वाॅंसुरी, मजीरा/झाॅंझ, वायलिन/गिटार, ड्रम, सिन्थेसाइजर

नृत्य लोकनृत्य 

शास्त्रीय नृत्य - भरतनाट्यम, ओडिसी एवं कत्थक

आधुनिक नृत्य

नाट्यप्रषिक्षण लोकनाट्य, शास्त्रीय नाट्य (दषरूपकाधारित), नृत्यनाटिका, वीथीनाटक,

आधुनिक नाट्य

(3) - सहभागिता/क्रियान्वयन

 विद्यालयीन विद्यार्थी इसमें सहभागी होंगे आवष्यकतानुसार स्थानीय व्यक्तियों एवं विषेषज्ञों का सहभाग लिया सकता है।

 उपरोक्त गतिविधि-आधारित प्रषिक्षण हेतु षिक्षकों, प्रषिक्षकों एवं विषेषज्ञों की आवष्यकता होगी। उनका तथा आवष्यक संसाधनों का सहभागी होगा।

 प्रत्येक गतिविधि के लिए विद्यालयीन शैक्षिणेतर समय में दो कालखण्ड (प्रति सप्ताह) प्रस्तावित है। जिसमें इनका संचालन एवं प्रषिक्षण किया जाना चाहिए। 

 प्रतियोगिताओं में प्रदेष/राष्टीªय स्तर की कला एवं नाट्य संस्थाओं के संयुक्त तŸवावधान में प्रादेषिक या राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन

 पुरस्कृत प्रतिभागियों का सतत् प्रषिक्षण केन्द्रों में प्रवेष हेतु अर्हता के रूप में उपरोक्त प्रमाण पत्रों की मान्यता।

 साथ ही अतिरिक्त अंक प्रदेय हों।

(4) - आवष्यकता

 पूर्वोत्तर गतिविधियों से सम्बन्धित समस्त संसाधन यथा-म´्च, अभ्यास कक्ष, विद्युतउपकरण, वाद्ययंत्र, वेषभूषा, परिधान, साजसज्जा इत्यादि से सम्बन्धित हैं वह आवष्यक होंगे। 

 षिक्षक, प्रषिक्षक एवं विषेषज्ञ -

1. सड्ड.ीत निर्देषक

2. नाट्य निर्देषक

3. गायन प्रषिक्षण

4. वाद्य प्रषिक्षण

5. नृत्य प्रषिक्षण

6. नाट्य प्रषिक्षण

7. रूपसज्जा प्रषिक्षण

8. वेशसज्जा प्रषिक्षण

(5) - परिणाम

 विद्यार्थी सांस्कृतिक कलाधारित परम्पराओं से जुड़ेगे।

 इससे विद्यार्थी भविष्य में अपना व्यावसायिक हित साध सकते है।

 कलाओं के संरक्षण के साथ-साथ, उनका समाज में प्रचार-प्रसार होगा।

 इन गतिविधियों से संस्कृति का रक्षण होगा।

 जीवनस्तर में सुधार एवं सांस्कृतिक मानवीय मूल्यों का संरक्षण और संवर्धन होगा।

 प्राच्य एवं आधुनिक कलाओं के प्रति समदर्षिता का भाव जाग्रत होगा।

(6) कार्यक्रमों का आयोजन -

 विद्यार्थियों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रमों निम्नानुसार होंगे:-

 प्रति रविवार एक ऐसी फिल्म का प्रदर्षन सी.डी.के माध्यम से विद्यार्थियों के लिये किया जाएगा जिसे देखने के बाद उनका आत्मविष्वास बढ़े। कुछ सुझावात्मक फिल्में निम्नानुसार है - डोर, ब्लैक, मीना, चकदे इण्डिया, अपराजिता, ब्ल्यू अम्ब्रेला, स्वदेष, इकवाल, फुटबाल शुटबाल हायरब्बा, आदि शंकराचार्य।

 सभी विद्यार्थियों के जन्मदिन निर्धारित तिथियों को मनाये जायेंगे। जिस विद्यार्थी का जन्मदिन होगा उसे दूसरे विद्यार्थी के द्वारा फूल गुलदस्ते या ग्रीटिंग अपने हाथ से बना कर दिये जाएंगे तथा भोजन में उस दिन जन्मदिन के उपलक्ष्य में एक स्वीट डिष सभी विद्यार्थियों के लिये बनाई जायेगी।

(7) कार्यक्रमों का आयोजन -

 गतिविधियाँ - अर्धवार्षिक मूल्यांकन का विष्लेषण चर्चा सुधार हेतु उपाय, प्रत्येक विद्यार्थी के माता पिता को अवगत कराना, छात्रावास में रहने पढ़ने हेतु प्रेक्टिस। अभिभावक के साथ बैठक (1 माह में एक बार) आयोजित करना।

(8) वार्षिकोत्सव -

 प्रत्येक आवासीय संस्कृत विद्यालय में वार्षिकोत्सव मनाया जाएगा जो सामान्यतः जनवरी माह में मनाया जाएगा।

 प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा छात्रावास में व्यतीत किए गये समय के अपने अनुभव, दक्षता, व्यवहार में परिवर्तन की जानकारी को आदानप्रदान।

 छात्रावास की एक वार्षिक पत्रिका तैयार की जाएगी जो विद्यार्थियों, वार्डन, सहायक वार्डन एवं रेमेडियल टीचर्स द्वारा तैयार की जाएगी। जिसमें वर्षभर की गतिविधियाँ, फोटो, विद्यार्थियों का परिचय, विद्यार्थियों क ेलेख, पेंिटंग, विद्यार्थियों का गत वर्ष का परीक्षा परिणाम इत्यादि सम्मिलित होगी। इसका विमोचन किया जाएगा। यह वार्षिक पत्रिका तैयार करना अनिवार्य है।

 सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण होगा।

 खेलकूद गतिविधियाँ।

 वर्षभर में सीखी गई गतिविधियों की प्रदर्षनी।

 वाद विवाद, निबन्ध प्रतियोगिताओं का आयोजन।

Reactions

Post a Comment

0 Comments