भोजन पकातें समय बरतनें वाली विषेष सावधानियाँ -

भोजन पकातें समय बरतनें वाली विषेष सावधानियाँ - 

हम भोजन को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए अने पाक-विधियों का प्रयोग करकें भोजन पकातें है। लेकिन भोजन पकातें समय वह भी देखना आवष्यक है कि भेाजन स्वादिष्ट बननें के साथ-साथ उसके पोषक मूल्य में कमी न आयें। अतः हमें भोजन पकातें समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:-

5.1 सब्जियों को जहां तक सम्भव हो छिल्कें सहित ही पकाना चाहिए। छिल्कें सहित पकानें से भोज्य तत्वों की हानि कम होती है।

5.2 विभिन्न सब्जियोें विषेष रूप से हरी पत्ती सब्जियों को धोकर फिर काटना चाहिए। काटकर धोने से कई भोज्य तत्व नष्ट हो जातें है।

5.3 सब्जियों को बहुत छोटे-छोटें टुकडों में नही काटना चाहिए। बहुत छोटे आकार के टुकड़ों से भी भोज्य तत्वों की हानि अधिक होती है।

5.4 भोज्य पदार्थों को बहुत अधिक समय तक पानी में नही भिगोना चाहिए तथा भीगें हुए भोजन मे पानी को नही फेंकना चहिए बल्कि भोजन को पकानें में प्रयोग कर लेना चाहिए। 

5.5 भोजन पकानें में प्रयोग किया गयें पानी को फेंकना नही चाहिए। पानी में भोजन के कई तत्व आ जातें है। पानी फेंकने से भोज्य तत्वों की हानि होती है।

5.6 भोज्य पदार्थों को बहुत अधिक समय तक नहीं पकाना चाहिए, बहुत अधिक समय तक पकाने से भोजन के पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। अतः भोजन को उस समय तक ही पकाया जाय जितना कि उसके वांछित गलने के लिए आवष्यक है।

5.7 भोजन को ढ़ककर पकाना चाहिए। पकातें समय भोजन खुला छोड़ने पर भोजन के जल में घुलनषील तत्व जल के साथ वाष्पीकृत हो जाते है। तथा भेाजन की सुगन्ध भी कम हो जाती है। 

5.8 खाने के सोडे का प्रयोग करने से भोज्य पदार्थ जैसे चना या राजमा आदि को गलाने के लिए किया जाता है पर खाने का सोड प्रयोग करने से भोज्य पदार्थो का विटामिन बी काम्प्लेक्स नष्ट हो जाता है। अतः खाने के सोड़े का प्रयोग नही करना चाहिए।

5.9 भोजन केा बार-बार गर्म नही करना चाहिए। बार - बार गर्म करने से भी भोजन के तत्व नष्ट हो जाते है।

5.10 भोजन में घी, तेज तथा मिर्च मसालें का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए ये पदार्थ भोजन के प्राकृतिक स्वाद को नष्ट कर देते है।

5.11 प्रोटीन युक्त पदार्थों जैसे - अण्डा, मांस, मछली, पनीर आदि को धीमी आग पर पकाना चाहिए अन्यथा ये पदार्थ कड़े हो जायेंगे।

5.12 भोजन पकातें समय व्यक्ति को अपने शरीर की सफाई, बर्तन व झाड़न की सफाई तथा भोज्य पदार्थ की सफाई पर विषेष ध्यान देना चाहिए।

(7) आहार का महत्व

विद्यार्थियों को सम्पूर्ण आहार की विषेष आवष्यकता होती है। अतः पोषक आवष्यकता पूरी होने के साथ-साथ स्वाद व स्वादतृष्णा का शांत होना भी इस आयु वर्ग की आवष्यकता है। इसी को ध्यान में रखा गया है। परन्तु मात्रा निष्चित रहेगी जिससें अगलें भोजन को न कर पानें की स्थिति न बनें।

रात्रि भोजन उपरांत 1 कप दूध विद्यार्थियों को ठंड के समय रात को सोेने से पूर्व दिए जाने वाले दूध में 2 खारक, 2 बादाम एवं 2-3 मुनक्के उबालकर दूध दें। तत्पश्चात् बादाम खारक विद्यार्थियों को खिलादें। तालिका सुझावात्मक है स्थानीय उपलब्धता के अनुसार परिवर्तन किया जा सकता है। बच्चों के उपवास के दिनों में उन्हें रूचिअनुसार फलाहार (साबूदाना, राजगिर, सिंघाढ़ा आदि) दिया जाए।

(8) पोषक भोज्य पदार्थ जो प्रस्तावित आहार तालिका में दिए गए है आवष्यक क्यों है ?

8.1 साबित अनाज:- साबित अनाज (रात्री में भिगोकर प्रातः प्रेषर कुक कर) नाष्तें में प्रस्तावित है।

8.2 साबित दालें, राजमा, छोले आहार तालिका में प्रस्तावित है।

8.3 दूध 500 मि.ली प्रतिदिन आहार तालिका में प्रातः व रात्रि 1-1 कप दूध इसके अलावा मट्ठा या रायता से मात्रा पूरी हो जाती है।

8.4 रोटी के लिए देसी चना 30ः गेंहू 70ः मिक्स कर पिसा आटा इत्तेमाल किया जाए।

8.5 गुड़ मूंगफली व सिका चना।

5.6 हरी पत्तेदार मौसमी सब्जी व मौसमी फल।

8.7 मिक्स दाल (जो एक कटोरी में ही विभिन्न पोषक तत्वों की आवष्यकता को पूर्ण करता है)

8.8 प्रस्तावित तालिका द्वारा विद्यार्थियों की पोषक संबंधी आवष्यकताएं पूर्ण हो रही है। जिसके इस अवस्था में सर्वागीण विकास उचित रूप से संभंव है।

(9) छात्रावास कक्ष का स्वरूप -

1. प्रकाष एवं हवा की कृत्रिम, यान्त्रिक एवं प्राकृतिक व्यवस्था

2. खिडकियां एवं दरवाजों में मच्छर रोधी व्यवस्था

3. वाटर फिल्टर (छात्रसंख्या अनुसार)

4. पर्दे की व्यवस्था


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