साहित्यिक एवं सम्भाषण गतिविधियाॅं

 (9) अभिलेखीकरण -

आयोजित गतिविधियों का अभिलेखीकरण किया जायेगा। अभिलेख में प्रत्येक आयाजित गतिविधि का विवरण, आवष्यकतानुसर फोटोग्राफ इत्यादि रखे जायेंगे। गतिविधियों में कौन-कौन उपस्थित हुआ तथा क्या क्या गतिविधियाँ हुई इसका विस्तार से विवरण लिखा जायेगा।

बिन्दु क्रमांक - 05 साहित्यिक एवं सम्भाषण गतिविधियाॅं

शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के अतिरिक्त साहित्यक गतिविधियों का संस्कृत साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन गतिविधियों के अभाव में संस्कृत षिक्षा की कल्पना नही की जा सकती है। आवासीय संस्कृत विद्यालयों में यह प्रयास होना चाहिए कि विद्यार्थी न केवल संस्कृत साहित्य की उत्कृष्ट पुस्तकों का अध्ययन करे वरन विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों में प्रतिभागी सभी विद्यार्थी के लिये पाठ्यचर्या की एक महत्वपूर्ण भाग की तरह स्वीकार करना चाहिए गतिविधियाँ निम्नानुसार है:-

साहित्यिक एवं सम्भाषण गतिविधियाॅं

(क) उद्देष्य -

 वैदिक एवं लौकिक संस्कृत साहित्यिक परम्पराओं का संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार।

 विद्यार्थियों में साहित्यिक गतिविधियों के प्रति जुड़ाव एवं मानसिक लगाव उत्पन्न करना ।

 विद्यार्थियों को साहित्य निर्माण की दिषा में प्रवृत्त करना।

 संस्कृत सम्भाषण के माध्यम से विद्यालयीय वातावरण को संस्कृतमय करना।

 वैष्विक परिप्रेक्ष्य में स्वयं को स्थापित करने के लिए, आंग्ल सम्भाषण का प्रषिक्षण।

 प्राचीन लिपियों का अध्ययन एवं प्रषिक्षण।

(ख) गतिविधियाँ -

(1) विभिन्न साहित्यिक, विधान्तर्गत प्रषिक्षण एवं स्पर्धाएं

- कष्टपाठ स्पर्धा एवं प्रषिक्षण

 काव्यकण्ठपाठ

 अमरकोषकण्ठपाठ

 अष्टाध्यायीकण्ठपाठ

 धातुरूपकण्ठपाठ

 भगवद्गीताकण्ठपाठ

- समस्यापूर्ति

- अक्षरष्लोकी

- निबन्धलेखन

- कवितापाठ (स्वरचित एवं अन्य प्रसिद्ध कवियों की रचनाएं)

- कवितालेखन

- कथालेखन एवं पाठ

 टुप कथा (लघु)

 कथा लेखन

 चित्राधारित कथा

 अनन्त वाक्य रचना

- संस्कृत क्रीडा

- भाषण एवं तात्कालिक भाषण

- वाद-विवाद

- वार्तावली

- विषिष्ट संवाद

(2) सभी विद्यार्थियों, विद्यालयीन षिक्षकों, प्रषिक्षकों एव ंकर्मचारियों के लिए संस्कृत सम्भाषण का षिक्षण एवं प्रषिक्षण एवं विषिष्ट वर्गो का आयोजन। 

(3) प्रमुख प्राचीन लिपियों, ब्राह्मी, शारदा, ग्रन्थ, नागरी आदि लिपियों का प्रषिक्षण।

(ग) सहभागिता एवं क्रियान्वयन -

 पूर्वोक्त गतिविधियों में विद्यालयीन विद्यार्थियों षिक्षकों, प्रषिक्षकों एवं आवष्यकतानुसार बाह्य विषेषज्ञों का भी सहभाग हो सकता है।

 संस्कृतसम्भाषण हेतु विद्यार्थियों, षिक्षकों, प्रषिक्षकों, कर्मचारियेां एवं बाह्य विषेषज्ञों का सहभाग होगा।

 साहित्यिक गतिविधियों एवं उपरोक्त अन्य गतिविधि आधारित प्रतियोगिताओं एवं स्पर्धाओं का आयोजन।

 साप्ताहिक बालसभाओं का आयोजन।

 स्थायी रूप में सतत् चलनषील संस्कृत संभाषण षिविरों के माध्यम से।

 विशिष्ट षिविरों के माध्यम से। प्रत्यक्ष विधि से।

यथा-

 कारक वर्ग

 समास/सन्धि वर्ग

 धातु/षब्द वर्ग

 अन्य सम्भाषणीय आवष्यकतानुसार विषिष्ट वर्ग

 आंग्लसम्भाषण के लिए पृथकतया षिक्षण एवं प्रषिक्षण का आयोजन

 प्राचीन लिपियों के प्रषिक्षण के लिए कार्यषालाओं का आयोजन

(घ) परिणाम -

 विद्यालय में संस्कृतमय वातावरण होगा। विद्यालय का हर सदस्य संस्कृत में सम्भाषण कर सकेगा।

 आंग्ल सम्भाषण के द्वारा छात्र वैष्विक परिवेष में अपना स्थान निर्धारित करते हुए वेष्विक गतिविधियों से जुड सकेगा।

 विद्यार्थी सामान्य व्यवहार में संस्कृत अपनाकर समाज को प्रभावित कर सकेंगे।

 विभिन्न साहित्यिक स्पर्धा एवं प्रषिक्षण से छात्रों का स्किल डेवलपमेन्ट हो सकेगा तथा भविष्य में रोजगार की सम्भावनाएॅं होगी।

 लिपिज्ञान से छात्र पाण्डुलिपियों का भविष्य में सम्पादन कर सकेगे तथा इस क्षे़त्र के इस रोजगारवृत्ति को अपना सकते है।


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