संस्कार एवं आत्मानुषासन

 संस्कार एवं आत्मानुषासन

  इन छात्रावासों के निकटस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा अस्पताल के डाॅक्टर्स को छात्रावास में जाकर नियमित साप्ताहिक स्वास्थ्य परीक्षण करने हेतु निर्देषित किया जायेगा।

 सभी आवासीय स्थल (छात्रावास) में विकासखण्ड मुख्यालय पर पदस्थ डाॅक्टर माह में एक बार आवष्यक रूप से भ्रमण कर प्रत्येक विद्यार्थी का स्वास्थ्य परीक्षण करें। इस हेतु डाॅक्टर्स की नामजद ड्यूटी लगाई जायेगी।

 प्रतिमाह स्वास्थ्य परीक्षण व्यवस्था की समीक्षा मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से एवं समय≤ पर कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत के स्तर से भी की जाये।

 प्रत्येक विद्यार्थी का स्वास्थ्य कार्ड पृथक-पृथक बनाया जायेगा। तथा प्रत्येक परीक्षण के समय पाई गई स्थिति उसमें लिखी जायेगी। संकलित जानकारी रजिस्टर में भी रखी जायेगी।

 सभी विद्यार्थियोें का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा सकता हैं अर्थात प्रतिमाह विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्ष्ण नियमित रूप से अनिवार्यतः करावाया जावेगा तथा उसका विधिवत रिकार्ड रखा जायेगा। इसी प्रकार विद्यार्थी के आवासीय संस्कृत विद्यालय में प्रथम प्रवेष के समय भी विद्यार्थी का चिकित्सकीय परीक्षण अनिवार्य होगा।

 पुरानी बीमारी से ग्रस्त विद्यार्थियों के लिये भी चिकित्सा का प्रबंध करना चाहिए। आवष्यकतानुसार रेडक्रास सोसायटी से कलेक्टर के माध्यम से सहायता ली जा सकती है।

(1) उद्देष्य -

 छात्रों को नैतिक मूल्यों व जीवन मूल्यों का ज्ञान कराकर अच्छे गुणों का विकास करना।

 छात्रों में आत्मानुषासन को ज्ञान से व्यवस्थित जीवन की ओर अग्रेषित करना।

(2) गतिविधियाँ -

 नैतिक व अध्याात्मिक षिक्षाप्रद कहानिया सुनाना, फिल्म दिखाना (क्वबनउमदजतल) नाट्य प्रस्तुतीकरण व अभ्यास।

 विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का पठन-पाठन।

 विविध क्रीडाओं व पाठ्य-सहगामी क्रियाओं को करना।

 समय पर विषय प्रमुख को बुलाकर व्याख्यान माला का आयोजन।

(3) सहभागिता/क्रियान्वयन -

 विद्यालयीन विद्यार्थी एवं षिक्षक की सहभागिता होगी।

 विषय विषेषज्ञ जो व्याख्यान देंगें।

(4) आवष्यकता -

 पुस्तकालय जिसमें विषय संबंधित पुस्तके एवं अध्ययन हेतु बैठने की व्यवस्था हो।

 प्रोजेक्टर एवं अन्य विद्युत उपकरण।

(5) आर्थिक नियोजन -

 समस्त संसाधनों हेतु आवष्यक धन की उचित रूप से व्यवस्था।

(6) परिणाम -

 सम्पूर्ण व्यक्त्तिव युक्त छात्र का निर्माण।

 जीवनस्तर में सुधार एवं नैतिक मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन।

बिन्दु क्रमांक -08: आवासीय/विद्यालयीन वेषभूषा/परिधान

(क) कक्षा - 1-5 तक संस्थागत - बालकों के लिये -धोती-कुर्ता बालिकाओं के लिये - सलवार - कुर्ता, दुपट्टा 

संस्थाओं हेतु रंग निर्धारण - ऐच्छिक

(ख) कक्षा- 6-12 तक बालकों हेतु - धोती-कुर्ता

बालिकाओं हेतु - सलवार-कुर्ता, दुपट्टा

रंग निर्धारण संस्थाओं हेतु - ऐच्छिक

बिन्दु क्रमांक - 09: विद्यालय परिवेष, साज-सज्जा, पर्यावरण एवं सुरक्षा

 विद्यालय का परिसर निर्माण जिस स्थान पर हो वहा आवागमन की व्यवस्थाऐं अनुकुल हो जैसे रेलवे, बस या अन्य साधनों से सरलता से पहुॅचा जा सके।

 विद्यालय का निर्माण करने के लिए ऐसे आश्रम मठ, मन्दिर, ट्रस्ट या शासकीय नियन्त्रण के देवस्थान तथा समितियों के सहयोग, सहकार या सहभागिता का विषेष ध्यान रखा जाए।

 विद्यालय का परिवेष प्राच्य आधारित शैली के समावेष के साथ बनाया जाना चाहिये।

 विद्यालय परिसर पूर्णतः शैक्षणिक गतिविधियों को समर्पित होना चाहिये।

 शैक्षणिक व्यवस्था में प्राचीन विषयों ज्योतिष, वास्तु, वेद, पौरोहित्य की प्रयोगशालायें हो।

 भौतिक विज्ञान, जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान, भाषा विज्ञान, कृषि विज्ञान की प्रयोगशालाऐं भी होनी चाहिये।

 संगणक प्रयोगषाला होनी चाहिये, यज्ञषाला, गौषाला, आर्युर्वेदषाला अनिवार्य होना चाहिए।

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